मूल नाम :श्री प्रेमानंद जी महाराज
वृन्दावन धाम, उत्तर प्रदेश |
श्री प्रेमानंद जी महाराज आधुनिक समय के एक अत्यंत सरल, तपस्वी एवं कृष्ण-भक्ति में लीन संत हैं। बाल्यकाल से ही वैराग्य, साधना और ईश्वर-चिंतन की ओर प्रवृत्ति। सांसारिक आकर्षणों से दूर रहकर इन्होंने अपना जीवन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, नाम-स्मरण और साधना को समर्पित किया ।
वृन्दावन धाम में रहकर महाराज जी निरंतर राधा-कृष्ण नाम जप, भागवत चिंतन एवं वैष्णव साधना में लीन रहते हैं। उनके प्रवचन अत्यंत सरल भाषा में होते हैं, जिनमें अहंकार त्याग, भक्ति, वैराग्य, सदाचार और आत्मशुद्धि पर विशेष बल दिया जाता है।
महाराज जी का जीवन स्वयं एक उपदेश है— न कोई दिखावा, न प्रचार, न चमत्कार— केवल नाम-स्मरण, सेवा और भक्ति।
आज सोशल मीडिया (YouTube, reels आदि) के माध्यम से उनके सत्संग और वचन लाखों लोगों तक पहुँच रहे हैं, जिनसे युवा वर्ग विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है। वे सिखाते हैं कि भक्ति ही जीवन का सार है और सच्चा सुख केवल प्रभु चरणों में है।
मुख्य शिक्षाएँ : निरंतर नाम जप अहंकार और दिखावे से दूरी सादा जीवन, उच्च विचार गुरु और भगवत् कृपा पर पूर्ण विश्वास सम्प्रति : वृन्दावन में रहकर मौन साधना, सत्संग और भक्ति मार्ग का प्रचार।
सम्प्रति : छत्तीसगढ़ शासन के विधिक मापविज्ञान के विभाग प्रमुख के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पश्चात स्वतंत्र लेखन।